इंतज़ार

आज फिर वही शाम हवाओं में वही ख़ुशबू शोर में भी सन्नाटा है तुमने कहा था,  मिलोगे वही जगा है वही सब कुछ  कल भी तेरा इंतज़ार था आज भी।