आशना

इतने दिनों की बातें, ख़्वाबों से सजाया, एक चेहरा, हज़ारों एक ख़्वाहिशों, से बंधी एक माला... आज मुलाक़ात की घड़ी यह सींचा चेहरा, किसी और का न...